लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल: एक बड़े आदमी का छोटा आवास

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल नई दिल्ली में स्थित भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री का निवास था। वास्तव में यह यह बंगला शास्त्री जी की सादगी और विनम्रता का प्रतीक है। भारत रत्न से सम्मानित लाल बहादुर शास्त्री 1952 से 1966 तक इसी लुटियन बंगले में रहे थे।

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल

यह छोटा सा बंगला मुगल सराय के उस वीर स्वतंत्रता सेनानी की स्मृतियों को संजोए हुए है, जिसने बहुत गरीबी में अपना जीवन बिताया था, लेकिन देश का वह बहुत शक्तिशाली व्यक्ति था।

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल में स्थित शास्त्री जी की प्रतिमा

लाल बहादुर शास्त्री को यह बंगला तब आवंटित हुआ था, जब वह एक केंद्रीय मंत्री थे। अपनी सादगी की वजह से उन्होंने प्रधानमंत्री बनने के बाद भी इस छोटे से बंगले को अपना आवास बनाए रखा और बड़े बंगले में नहीं गए। लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल के इसी बंगले के एक छोटे से कक्ष में 1964 में उन्होंने कैबिनेट की र्मींटग आयोजित की थी।

लाहोर में जाकर भारतीय सेना का मनोबल बढ़ाया

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
भारत-पाक युद्ध के हीरो शास्त्री जी 1 सितंबर 1965 को लाहोर में भारतीय सेना को संबोधित करते हुए

पाकिस्तान के सेनानायक भारतीय नेताओं को ‘धोती प्रसाद’ कहकर मजाक उड़ाते थे। लेकिन 1965 के भारत-पाक युद्ध में इस छोटे से कद के लाल बहादुर शास्त्री ने सबसे लंबा आदेश दिया था, जिसके फलस्वरूप भारतीय सेनाएं अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को पार करती हुई लाहोर तक जा पहुंची थी और वहां जाकर लाल बहादुर शास्त्री ने अपनी सेना का मनोबल बढ़ा था।

इसी बंगले में ही उगाए गए थे शास्त्री जी ने गेहूं

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
अपने बंगले में उगाए गेहूं की बालियों का निरीक्षण करते हुए शास्त्री जी

लाल बहादुर शास्त्री के सामने दूसरा संकट कृषि की कम पैदावार का था। उन दिनों रोज लोग भूख से मर रहे थे। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया कि एक समय भोजन का त्याग करें, ताकि भूखे लोगों को भोजन मिल सके। उन्होंने इसी बंगले के मैदान में हल जोतकर गेहूं की फसल उगाई। शास्त्री जी द्वारा उगाई हुई गेहूं की बालियां आज भी इस संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई हैं।

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
लाल बहादुर शास्त्री का जयघोष

लाल बहादुर शास्त्री पहले ऐसे नेता थे, जिन्होंने किसानों और सैनिकों की भावनाओं और महत्व को समझा। उन्होंने ‘जय जवान, जय किसान’ नारा दिया, जिसकी गूंज हिंदुस्तान में सुनाई दी और लोगों ने भी उनके महत्व को समझा।

मेमोरियल में खड़ी है शास्त्री जी की फिएट कार

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लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल में खड़ी शास्त्री जी की फिएट कार

लाल बहादुर शास्त्री संग्रहालय शास्त्री जी के सार्वजनिक और निजी जीवन को प्रदर्शित करता है। संग्रहालय के पीछे के भाग में पोर्टिको में शास्त्री जी की खरीदी हुई एक फिएट कार खड़ी है। शास्त्री जी ने इसे पंजाब नेशनल बैंक से लोन पर लिया था। 1964 के इस मॉडल का नंबर ई 6 है। इस कार का ऋण उनकी विधवा ललिता शास्त्री ने चुकाया था।

मेमोरियल के बरामदे में रखा गया था शास्त्री जी का पार्थिव शरीर

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल का बरामदा

लाल बहादुर शास्त्री 1966 में रूस के ताशकंद में 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद शाति वार्ता करने गए थे, जहां शांति वार्ता पर हस्ताक्षर करने के बाद उनका निधन हो गया था। लाल बहादुर शास्त्री के पार्थिव शरीर को लोगों के दर्शन के लिए इसी बंगले में बाहर के बरामदे में रखा गया था।

मेमोरियल में है शास्त्री जी का अस्थि कलश

ललिता शास्त्री के बिना लाल बहादुर शास्त्री की कहानी अधूरी है। वास्तव में शास्त्री जी के पीछे उनकी पत्नी की वह पवित्र आत्मा थी, जिसने उनका दयालुता, ईमानदारी, दृढ़ता के साथ आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त किया। ललिता शास्त्री की शास्त्री जी के प्रति जो समर्पण की भावना थी, उसी ने शास्त्री जी को इतना सबल बनाया कि वह अपने मिशन में कामयाब रहे।

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल का प्रवेश द्वार

लाल बहादुर शास्त्री स्मृति में एक छोटा सा कलश है, जिसमें शास्त्री जी की अस्थियां रखी गई थीं। यहां अष्ट धातु का एक बड़ा पात्र भी है, जिससे शास्त्री जी के पार्थिव शरीर को नहलाया गया था। ललिता शास्त्री उसी पात्र में रखे जल का इस्तेमाल करती थीं। जब पात्र में जल कम हो जाता, तो वह उसे फिर से भर देती थीं।

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
लाल बहादुर शास्त्री यहां खेलते थे बैडमिंटन

लालबहादुर शास्त्री की मृत्यु के 27 साल बाद उनकी विधवा ललिता शास्त्री का निधन हुआ था। वह जब तक जीवित रहीं, शास्त्री जी की समाधि ‘विजय घाट’ पर रोज सुबह माथा टेकने इसी बंगले से जाती थीं। उनकी मृत्यु के बाद इस बंगले को लाल बहादुर शास्त्री स्मृति में बदल दिया गया।

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
इस बुश ट्री को शास्त्री जी ने खुद उगाया था

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल का उद्घाटन 7 मई 2005 को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने किया था। इस मेमोरियल में शास्त्री जी के जीवन से संबंधित जो भी सामान दर्शाया गया है, वह शास्त्री जी की मेहनत, ईमानदारी और सादगी को दर्शाता है।

मेमोरियल में है ललिता शास्त्री का पूजाघर और रसोई​

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल की आंतरिक जगह को कई रूप में विभाजित किया गया है। इनमें शास्त्री जी के इस्तेमाल में की गई चीजों को प्रदर्शित किया गया है। अंदरूनी इमारत में एक ड्राइंग रूम, एक एन्ट रूम, एक बेडरूम और इमारत के पीछे एक बरामदा है। एक दूसरे खंड में एक छोटा सा बेड रूम है, जिसमें बहुत साधारण सा फर्नीचर है। यह शास्त्री जी के साधारण जीवन और की उच्च सोच के आदर्शों को दर्शाता है। अन्य कमरों में ललिता शास्त्री का पूजा घर और रसोई है।

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल का पिछला भाग, जहां उनकी रसोई थी

रसोई छोटी और साधारण है। इसमें कुछ पीतल-तांबे के बर्तन, चूल्हा, अंगीठी और एक अति साधारण गैस स्टोव है। कुछ आंतरिक जगहों पर शास्त्री जी के सामाजिक-राजनीतिक जीवन से संबंधित अन्य चीजों को प्रदर्शित किया गया है। फोटोग्राफ, स्मृति चिह्नों, कला वस्तुओं आदि के माध्यम से शास्त्री जी के विदेशी संबंधों को दर्शाया गया है।

मेमोरियल में प्रदर्शित हैं शास्त्री जी की व्यक्तिगत चीजें

एक खंड में शास्त्री जी की व्यक्तिगत चीजों को प्रदर्शित किया गया है। उनमें उनके खादी के कपड़े हैं। एक ऊनी कोट है, जिसे भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने उन्हें उपहार में दिया था। संग्रहालय में उनका पेन, खडाऊं, चश्मा और कई अन्य चीजें प्रदर्शित की गई हैं।

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
शास्त्री जी ने अपनी मां के लिए लगवाया था यह हैंड पंप

लाल बहादुर शास्त्री स्मृति में भवन के पीछे की ओर उनका एक कार्यालय कक्ष भी है, जहां बैठकर वह घर में ही अपने कार्यालय का महत्वपूर्ण कार्य किया करते थे। इसी कक्ष से एक दरवाजा बंगले के पीछे की ओर खुलता है, जहां बगल के बंगले में उनका प्रधानमंत्री कार्यालय था। बगल का यह बंगला 10 जनपथ है, जहां आजकल कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का निवास है। अब उसे एक ऊंची दीवार खींचकर अलग कर दिया गया है।

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल की लोकेशन

1, मोतीलाल नेहरू पैलेस, 10 जनपथ के पास, मान सिंह रोड एरिया, नई दिल्ली 110011

संपर्क: फोन +91-11-23794224

अपने स्थान से लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल की दूरी और कार से लगने वाला समय जानने के लिए ऊपर डिस्टेंस कैलकुलेटर पर क्लिक करें।

कैसे पहुंचे?

कनॉट प्लेस (राजीव चौक मेट्रो स्टोशन) से दूरी: 3 किलोमीटर। कनॉट प्लेस से कार से यहां पहुंचने में 7 मिनट का समय लगता है। आप ‘ओला’ या ‘उबर’ कैब का एप डाउनलोड करके वाजिब दाम में दिल्ली में कहीं भी कैब से यात्रा कर सकते हैं। इसके अलावा ऑटो रिक्शा का ऑप्शन आपको हर जगह मिलेगा।

नजदीकी मेट्रो स्टेशन: उद्योग भवन

 

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल के लिए सभी महत्वपूर्ण स्थानों से बसें चलती हैं। अपने स्थान से इस मेमोरियल तक आने के लिए आपको कौन-कौन सी बसें सूट करती हैं, यह जानने के लिए आप ऊपर ‘बस रूट’ पर क्लिक करें।

आवश्यक जानकारी

खुलने का समय : सुबह 10 बजे से सायं 5 बजे

अवकाश : मंगलवार

प्रवेश टिकट : निशुल्क

फोटोग्राफी : लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल की इमारत और बाहर के क्षेत्र की फोटोग्राफी की अनुमति है। लेकिन मेमोरियल के अंदर फोटोग्राफी की अनुमति नहीं है।

भ्रमण में लगने वाला समय : आधा से एक घंटा

नजदीकी आकर्षण

गांधी स्मृति, इंदिरा गांधी मेमोरियल, राष्ट्रीय संग्रहालय, इंडिया गेट, अग्रसेन की बावली, लोदी गार्डन, हुमायूं का मकबरा, तीन मूर्ति, पुराना किला, चिड़ियाघर आदि।

 

लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
लाल बहादुर शास्त्री का 5 रुपए का सिक्का
लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल
लाल बहादुर शास्त्री का 15 पैसे का टाक टिकट

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