गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज : पंच इंद्रिय उद्यान

निश्चित रूप से गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज एक ऐसा उद्यान है, जिसे पांचों इंद्रियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। इसलिए पंच इंद्रिय उद्यान भी कहते हैं। यह उद्यान ‘दिल्ली पर्यटन एवं परिवहन विकास निगम’ द्वारा विकसित किया गया है। इसका उद्घाटन फरवरी 2003 में हुआ था। दिल्ली के प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल ‘किला राय पिथौरा’ के समीप बने इस उद्यान में 25 से ज्यादा शैल शिल्प बने हुए हैं।

गार्डन अॊफ फाइव सेंसेज
गार्डन अॊफ फाइव सेंसेज

यहां मिलती है पांचों इंद्रियों को तृप्ति

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पांचों इंद्रियों की पूरी होती है चाहत यहां

गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज में रंग, रूप, गंध, ध्वनि एवं स्वाद की पूरी व्यवस्था की गई है। वास्तव में शरीर की पांच ज्ञानेंद्रियों (आंख, कान, नाक, त्वचा और जीभ) की तृष्णा के लिए यह उद्यान सर्मिपत है। यह एक शांत, नीरव एवं मनोहर परिसर है। इसी कारण से यह उद्यान प्रेमी युग्लों के बीच काफी लोकप्रिय भी है।

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पूलों की सुगंध से महक उठता है यह चिलमन

इस उद्यान के मोहक दृश्य, फूलों की सुगंध, बेहतरीन कलाकृतियों का स्पर्श, पत्तियों की सरसराहट और घंटियों की मधुर ध्वनि और रेस्तरां में लजीज भोजन का मजा हर कोई व्यक्ति ले सकता है। अत: हर व्यक्ति की आंख, नाक, कान, त्वचा और जीभ को यहां तृप्ति मिलती है। यही बात इस पार्क को सबसे अलग बनाती है।

फूलों के लगते हैं मेले यहां

प्रवेश करते ही उद्यान का पहला हिस्सा पत्थर और टेराकोटा से बनी कलाकृतियों से निर्मित किया गया है। यही नहीं आप यहां राजस्थानी फाड शिल्प कलाओं, मृदभांड और टेराकोटा से बनी अद्भुत कलाकृतियों का स्पर्श भी कर सकते हैं। इस हिस्से में कलाकारों का एक खंड भी है। आगे इस गार्डन को दो भागों में बांटा गया है।

मुगल गार्डन की तर्ज पर बनाया गया है बाग

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मुगल गार्डन की तर्ज पर बनाया गया है खास बाग

एक हिस्से में मुगल गार्डन की तर्ज पर ‘खास बाग’ बनाया गया है। इसकी विशेषता यह है कि इसमें छोटी नहर, तालाब और घुमावदार रास्तों और सीढ़ियों के किनारे मनमोहक और सुगंधित पौधों को लगाया गया है। इसके परिणाम स्वरूप ये सुंदर पुष्प और पौधे आंखों और नाक को मंत्रमुग्ध करने में सक्षम हो जाते हैं।

घुमावदार रास्तों के किनारों पर लगे हैं सुगंधित पौधे

इस बाग के लंबाई वाले क्षेत्र में वाटर चैनलों में धीमी गति से चलने वाले फव्वारे हैं। साथ ही इनके रास्तों पर खुश्बूदार फूलों वाली झाड़ियां और पेड़-पौधे हैं। एक और मध्य भाग में फव्वारों की एक पूरी शृंखला है, जो फाइवर ऑप्टिक सिस्टम से प्रकाशित होती है।

जगह-जगह खिले हैं फूल यहां

उद्यान के दूसरे भाग में ‘नील बाग’ है। इसमें छोटे-छोटे तालाब में खिलता कमल, कुमदिनी, लताएं हैं और इसके अलावा कुछ खास किस्म की झाड़ियां हैं।

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एडवेंचर्स के लिए बहुत कुछ है यहां

गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज के बीचोबीच एक छोटे से तालाब के पास स्टील का बना फव्वारा है। इसमें लगी घंटियां जब हवा के झोंकों से बजती हैं और झाड़ियों में बैठी चिड़ियां चहचहाने लगती हैं, तो और भी अधिक कर्णप्रिय दृश्य उपस्थित हो जाता है।

वनस्पति प्रेमियों के लिए स्वर्ग है गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज

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वनस्पति प्रेमियों के लिए स्वर्ग है यह गार्डन

वनस्पति प्रेमियों के लिए तो यह उद्यान एक स्वर्ग है। यहां लगभग 200 तरह के पेड़-पौधों को दर्शाया गया है। इसके परिणाम स्वरूप मैदान में फैली चट्टानों और पेड़-पौधों के बीच बड़ा ही मनमोहक दृश्य पैदा होता है।

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दुर्लभ पेड़-पौधों को देखने दूर-दूर से आते हैं लोग

इस गार्डन में पेड़-पौधों का एक खास खंड भी है। इसमें बड़े दुर्लभ पेड़-पौधे हैं। जैसे-कल्प वृक्ष, अर्जुन, रुद्राक्ष, कदंब, कर्पूर, सागवान, खास किस्म के कैकटस और बड़ी दुर्लभ जड़ी-बूटियां।

गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज में हैं कई फूड स्टाल

गार्डन अॊफ फाइव सेंसेज में हैं कई फूड स्टाल

गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज में खाने-पीने की भी पूरी व्यवस्था है। गार्डन के उत्तरी छोर पर एक रेस्तरां और कुछ फूड स्टाल हैं, जहां अच्छे भोजन का मजा लिया जा सकता है। इस उद्यान में एक खंड सौर ऊर्जा को सर्मिपत है। यहां जन सुविधाओं का भी पूरा ख्याल रखा गया है।

नृत्य-संगीत का इंतजाम है गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज में

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नृत्य-संगीत के लिए यहां है एक रंगमंच

फूलों की सुंगध वाला एक रास्ता एक चट्टान की श्रेणी की ओर ले जाता है, जहां चट्टान के बीच स्टील से बनी प्रतिमा आनंद से झूमती नजर आती है। इस पंच इंद्रीय उद्यान में संगीत का भी पूरा ख्याल रखा गया है। प्राकृतिक ढलानों के बीच एक एम्फिथिएटर है, जहां बैठने के लिए पत्थर की शिलाएं रखी गई हैं। समय-समय पर यहां स्टेज प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं।

गार्डन में खूब होते हैं सांस्कृतिक कार्यक्रम

गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज एक मनमोहक पार्क ही नहीं है, बल्कि यह सैर-सपाटे के अलावा सामूहिक कार्यक्रम और गतिविधियों वाला मनोरंजक पार्क भी है। इस गार्डन के पिछले हिस्से में एक खुला प्रदर्शनी क्षेत्र है। यहां कला के प्रदर्शन और आर्ट वर्कशॉप की व्यवस्था की जाती है।

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सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए यह है एक उपयुक्त स्थल

इस गार्डन को दिल्ली के प्रमुख सास्कृतिक स्थलों में शामिल किया जाता है, क्योंकि यहां पूरे साल कोई न कोई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। यहां ‘फूड फेस्टिवल’ डांडिया उत्सव और कई तरह के मेले आयोजित किए जाते हैं।

गार्डन फेस्टिवल है सबसे उल्लेखनीय

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फूलों का लगता है सबसे बड़ा मेला यहां

गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज में सबसे प्रमुख फरवरी में होने वाला ‘गार्डन फेस्टिवल’ है, जो तीन दिन तक चलता है। इस फूल मेले में देश भर से वनस्पति प्रेमी अपने दुर्लभ पेड़-पौधों को लेकर यहां प्रदर्शनी में भाग लेते हैं। कई सरकारी विभाग भी इस प्रदर्शनी में शामिल होते हैं।

इस मेले में बढ़िया प्रदर्शित पेड़-पौधे और पुष्प कलाकृतियों को पुरस्कार भी दिए जाते हैं। इस मेले में बड़ी भारी संख्या में लोग शिरकत करते हैं। यहां दुर्लभ पेड़-पौधों की बिक्री भी की जाती है। इसलिए गार्डनिंग के शौकीन लोगों के लिए यह मेला सबसे ज्यादा महत्व रखता है और वे साल भर तक इस मेले का इंतजार करते हैं।

यहां बनाई गई है मेक्सिको के लैबना पार्क की प्रतिलिपि

भारत और मेक्सिको के संबंधों को प्रगाढ़ बनाने के लिए 2003 में गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज में मेक्सिको के लैबना पार्क की एक प्रतिलिपि बनाई गई है। माया सभ्यता की यह मेहराबनुमा इमारत मेक्सिको के युकातान नामक स्थान पर स्थित है। इस महल के भीतर 862 एडी तारीख खुदी हुई है।

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मेक्सिको के लैबना पार्क की एक प्रतिलिपि

इस प्रतिलिपि का निर्माण ‘इंडियन नेशनल ट्र्स्ट एंड कल्चरल हैरिटेज’ द्वारा किया गया है। इसके लिए राजस्थान से पत्थरों को लाया गया है। ये पत्थर युकाटन में पाए जाने वाले पत्थरों के समान ही दिखते हैं।

देश के कलात्मक केंद्रों में से एक हैं यह गार्डन

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देश के सबसे बड़े कलाकेंद्रों में से एक है यह गार्डन

निश्चित रूप से गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज देश के सबसे बड़े कलात्मक केंद्रों में से एक है। यहां युवा कलाकारों ने भारतीय परंपरागत कला के साथ आधुनिक कला का भी समावेश किया है। यहां बहुत सी टेराकोटा की कलात्मक वस्तुओं को प्रर्दशित किया गया है, जिनके मास्टर शिल्पी अंगूरी देवी और गिरिराज हैं। कलाकार गिरिराज ने गार्डन के प्रवेश द्वार पर एक लटकी हुई फाड वाल को बनाया है।

गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज में है बहुत से कलाकारों का योगदान

गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज में कला के ज्यादातर काम समसामयिक हैं। इन कलाकारों में एम.जे. इनाज, सुबोध केरकर, के.एस. राधाकृष्णन, क्रिस्टीन माइकल, रत्नबाली कांत और मूर्तिकार जॉन बोमैन के काम उल्लेखनीय हैं। जॉन बोमैन कई दशकों से भारत में ही रह रहे हैं।

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धातु के इस स्तंभ पर लगी घंटियां की ध्वनि से गुंजायमान हो जाता है यह उपवन

इसके अलावा इस गार्डन में दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट के बहुत से छात्रों के काम शामिल हैं। इस गार्डन की प्रेरणादायक वास्तुकला विभिन्न सांस्कृतिक परंपराओं से प्रभावित हैं। कांस्य के फाउंटेन ट्री को बोमैन ने बनाया है। सिरेमिक से बर्नी विंडबेल को माइकल क्रिस्टीन ने बनाया है।

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धातु की कलात्मक प्रतिमा

भारतीय कलाकार इनाज ने बनाई है एक आदमी की कलात्मक प्रतिमा, जिसने आर्टव्हील के रूप में एक महिला की कलात्मक प्रतिमा को उठा रखा है। राधाकृष्णन का हैरिटेज कॉलम भी उल्लेखनीय है। बच्चों की प्रार्थना करती हुई मूर्तियां कमल नारायणन ने बनाई हैं।

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पार्टियों, पिकनिक औऱ मेलों के लिए स्वर्ग है गार्डन ऒफ फाइव सेंसेज

गार्डन ऑफ फाइव सेसेंज को जन्मदिन की पार्टियों, पिकनिक, पर्व, शादियों, कॊर्पोरेट मीटिंग आदि यादगार कामों की मेजवानी के लिए भी बुक किया जाता है। यही नहीं फिल्म शूटिंग के लिए भी यह जगह अनुकूल है।

गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज की लोकेशन

वेस्टर्न मार्ग, साकेत मेट्रो स्टेशन के पास, सैद-उल-अजैब गांव, नई दिल्ली 110030

सबसे पहले अपने गंतव्य से गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज की दूरी जानने के लिए ऊपर डिस्टेंस कैलकुलेटर पर क्लिक करें और कार से यहां तक पहुंचने में लगने वाला समय जानें।

कैसे पहुंचे

कनॉट प्लेस (राजीव चौक मेट्रो स्टेशन) से गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज की दूरी 16 किलोमीटर है और कार से यहां तक पहुंचने में 45 मिनट का समय लगता है। आप ‘ओला’ या ‘उबर’ का एप डाउनलोड करके दिल्ली में किसी भी स्थान से कहीं भी जाने के लिए मुनासिब दाम पर कैब बुक कर सकते हैं। इसके अलावा आपके पास ऑटो, बस और मेट्रो का ऑप्शन भी है।

नजदीकी मेट्रो स्टेशन: साकेत। साकेत से गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज की दूरी लगभग 1 किलोमीटर है।

गार्डन ऑफ फाइव सेंसेज के लिए दिल्ली के सभी महत्वपूर्ण स्थानों से बसें चलती हैं। अपने गंतव्य से इस गार्डन तक आने के लिए आपको कौन सी बसें और मेट्रो सेवा सूट करेगी, यह जानने के लिए ऊपर ‘बस और मेट्रो रूट’ पर क्लिक कीजिए।

आवश्यक जानकारी

खुलने का समय: अप्रेल से सितंबर तकः सुबह 9 बजे से सायं 7 बजे, अक्तूबर से मार्च तकः सुबह 9 बजे से सायं 6 बजे तक

अवकाश: कोई नहीं

प्रवेश टिकट: व्यस्क: 35 रुपए, बच्चा: (12 साल तक) 15 रुपए, सीनियर सिटिजन: 15 रुपए, विकलांग: कोई शुल्क नहीं

फोटोग्राफी: फोटोग्राफी और वीडियग्राफी की अनुमति, कोई शुल्क नहीं

भ्रमण में लगने वाला समय: एक घंटा

पार्किंग: उपलब्ध

नजदीकी आकर्षण

किला राय पिथौरा, छतरपुर मंदिर, महरौली आर्कियोलॊजिकल पार्क, अहिंसा स्थल, कुतुब मीनार, बटरफ्लाई पार्क, अशोका मिशन, मोहम्मद कुली खां का मकबरा, संजय वन

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